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तपोभूमि देवबड़ला में फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया स्नान

फाल्गुन कृष्ण अमावस्या पर, विशेष रूप से पूर्वजों (पितरों) को तर्पण, पिंडदान किया

तपोभूमि देवबड़ला में फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया स्नान

सोनकच्छ – मां नेवज नदी के उद्गम स्थल व पुरातत्व धरोहर देवांचल धाम देवबड़ला बीलपान में उमड़ा आस्था का जन शैलाब मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह भगतजी ने कहा हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन (पूर्णिमांत) / माघ (अमांत) मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है. अमावस्या, जो फाल्गुन कृष्ण अमावस्या है, विशेष रूप से पूर्वजों (पितरों) को तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध अर्पित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दिन स्नान-दान, पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना, और पितृ दोष से मुक्ति के लिए उपवास रखना बहुत पुण्यकारी माना गया है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

देवबड़ला स्मारक इंचार्ज कुंवर विजेंद्र सिंह भाटी ने बताया फाल्गुन अमावस्या पर क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवबड़ला पहुंचे कुंड से मां नेवज का पवित्र जल निकाल कर स्नान किया एवं बाबा विलवैश्वर महादेव की पूजा अर्चना कर क्षेत्र की सुख शांति के लिए मंगल कामनाएं की हर अमावस्या पर यहां बड़ी संख्या में पडियार लोग भी आते हैं

जो बैठक कर अनेक श्रद्धालुओं के दुःख दर्द दूर करते हैं व क्षेत्र में होने वाली घटनाओं के बारे में संकेत देते हैं ताकि जनमानस सतर्क रहे और जान-माल हनी ना हो पुरातत्व विभाग जल्द ही यहां पर पुनः काम शुरू करेगा उसके लिए आगे की रणनीति तैयार की जा रही है

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